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Showing posts from December, 2017

शब्दों में उलझा इतिहास

इतिहास को पढने पढ़ाने समझने और समझाने के तरीके ने इतिहास का जितना बेडा गर्क किया है शायद उतना बुरा इसके विभिन्न writing schools ने नहीं किया है। आज हम अक्सर leftist writing तो कभी rightist writing तो कभी orientalist writing को इतिहास  बिगाड़ने का श्रेय देते हैं, लेकिन  schools में जिस तरह से इतिहास पढ़ाया जाता  है उसका बाल मन पर क्या प्रभाव   पड़ता है इसकी  चर्चा भी जरुरी  है।   बचपन में हमसे अक्सर पूछा जाता था कि भारत की खोज किसने की।  और हम बड़े   शान   से Vasco  Da  Gama का नाम लेते   थे।  मन में यही आता था कि Vasco Da Gama से  पहले  भारत को कोई  जानता ही  नहीं था ।  जबकि  सच्चाई  यह है कि  यूरोप  से  भारत  तक के    समुद्री मार्ग की खोज Vasco da gama ने की थी।                             एक और प्रश्न जिसे हम अक्सर रु-ब-रु ...

“हलाला” का यह कैसा justification?

समय के साथ सोच, व्यवहार, नैतिकता, सभी बदलते हैं। निश्चित रूप से परिभाषाएँ भी बदलती हैं और उन definitions को अपनी सहूलियत के हिसाब से explain भी किया जाता है। “हलाला” एक ऐसी कुप्रथा है जिसे मर्द कितना भी justify कर ले, व्यावहारिक दृष्टिकोण से उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसे सही ठहराने के लिए क़ुरान के आयतों को अनेक ढंग से explain  गया है जिसमें हलाला को अपने मूल रूप से बिलकुल अलग दर्शाया गया है।       इससे पहले कि क़ुरान में हलाला के provisions पर बात करें , मैं Facebook के एक video post को चर्चा में लाना चाहता हूँ। video शाज़िया नवाज़ के द्वारा निर्मित है और उन्ही के द्वारा post भी किया गया है। शाज़िया पाकिस्तान की हैं। वहीं उनकी पढ़ाई लिखाई हुई और अब वह अमेरिका में रहती हैं। पेशे से डॉक्टर हैं और निश्चित रूप से काफ़ी आधुनिकता (modern) हैं। इस video post में उन्होंने हलाला पर अपना विचार व्यक्त किया है। वह कहती हैं कि  हलाला दरअसल औरतों पर ज़ुल्म नहीं बल्कि मज़ा करने का एक मौक़ा है। इसे उन्होंने justify करते हुए कहा है कि हलाला उस मर्द के लिए सज़ा है जिसने...