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कुछ तो शर्म करो यार.....

नीतीश जी की सरकार चार वर्ष पूरी कर रही थी और और इस वर्ष भी पूरे ताम-झाम के साथ रिपोर्ट-कार्ड पेश करने की रस्म अदा होनी थी. जश्न में चार चाँद लगाने के लिए राज्य के सभी बड़े-बड़े अखबारों को विज्ञापनों से सजाया गया. विज्ञापन भी इस तरह कि प्रत्येक अखबार को पांच-छह पन्नो का परिशिष्ट लगाना पड़ा. गत २४ नवम्बर का अखबार प्रशस्ति-पत्र ही था. हद तो तब हो गयी जब एक जाने-माने अखबार के कोलकाता अवस्थित मुख्यालय को सारा विज्ञापन चला गया और उसके पटना संस्करण को एक भी हाथ नहीं लगा.                                                    अब ज़रा मुख्यमंत्री जी के प्रेस कांफ्रेंस पर भी नज़र डालें. स्वागत भाषण में उप-मुख्यमंत्री ने बिहार से मजदूरों के पलायन में आयी कमी को दिखाने के लिए क्या ज़बरदस्त आंकड़ा दिया. बकौल उनके २००६-०७ में ८८५ करोड़ रुपये मानी आर्डर के...